कृतज्ञता से समृद्धि: वैदिक धन चेतना मार्ग आज के आधुनिक निवेश युग में लोग रिटर्न, पोर्टफोलियो, एसेट एलोकेशन और वेल्थ क्रिएशन की बात तो बहुत करते हैं, लेकिन एक अत्यंत गहरी और प्राचीन अवधारणा को नज़रअंदाज़ कर देते हैं—कृतज्ञता (Gratitude), जिसे भारतीय वैदिक परंपरा में “शुक्राना” कहा गया है। एक निवेश विशेषज्ञ के रूप में मेरा अनुभव यह स्पष्ट बताता है कि दीर्घकालिक वित्तीय और आध्यात्मिक समृद्धि केवल रणनीति, गणना और बाजार की समझ से नहीं, बल्कि मानसिक ऊर्जा और आंतरिक दृष्टिकोण से भी निर्मित होती है। पश्चिम में “Law of Attraction” का सिद्धांत लोकप्रिय है, जो कहता है कि आप जिस ऊर्जा और विचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही आपके जीवन में आकर्षित होता है। भारतीय वैदिक दर्शन में यह विचार नया नहीं है। “शुक्राना” या कृतज्ञता को सदैव समृद्धि, संतोष और लक्ष्मी प्राप्ति का मूल आधार माना गया है। कृतज्ञता और धन चेतना का गहरा संबंध निवेश केवल पैसों का खेल नहीं है; यह मानसिकता (Mindset), भावनात्मक अनुशासन और ऊर्जा प्रबंधन का विज्ञान है। जब व्यक्ति लगातार कमी (Scarcity) की भावना में जीता है—“मेरे प...
नौसेना वास्तुकार; जीवन प्रशिक्षक; निवेशक; ब्लॉगर; अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त फेंग शुई मास्टर; लेखक:
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